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29/08/2025

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ट्रम्प के टैरिफ की वजह से तबाही के कगार पर गारमेंट सेक्टर, लाखों महिलाओं की नौकरियाँ जा सकती हैं

ट्रम्प के टैरिफ की वजह से तबाही के कगार पर गारमेंट सेक्टर, लाखों महिलाओं की नौकरियाँ जा सकती हैं

ट्रम्प के टैरिफ की वजह से तबाही के कगार पर गारमेंट सेक्टर, लाखों महिलाओं की नौकरियाँ जा सकती हैं

गारमेंट सेक्टर में महिलाओं की नौकरियां जाने वाली है ट्रम्प के टैरिफ और जुर्माने के कारण गारमेंट सेक्टर में लाखों लोगों के रोजगार जाने की बातें छप रही लेकिन आपको पता होना चाहिए कि गारमेंट सेक्टर में ज्यादातर महिलाएं काम करती है उनकी नौकरियां जाए, इस संकट का चेहरा कोई आंकड़ा नहीं हो सकता

इतने लाख लोगों की नौकरी जा रही है इस संकट का एक बड़ा चेहरा हैं, एक ही चेहरा है और वह लाखों महिलाओं का है जिनकी नौकरी जाने वाली मोदी सरकार को बताना चाहिए कि जिनकी नौकरियां जाएंगी उन महिलाओं के लिए क्या किया जाएगा इस बीच अमेरिका से एक नई धमकी आयी है के आर्थिक सलाहकार केबिन हैं सेट ने कह दिया है कि अगर भारत नहीं झुकेगा तो मुझे नहीं लगता राष्ट्रपति ट्रंप झुकेंगे

ट्रम्प के टैरिफ की वजह से तबाही के कगार पर गारमेंट सेक्टर, लाखों महिलाओं की नौकरियाँ जा सकती हैं

 

ट्रम्प के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसिक ने भी कहा, रूस के तेल के कारण नहीं बल्कि मोदी और ट्रम्प के जटिल रिश्तों के कारण हो रहा है तो ये जटिलता क्यों है, किस की तरफ से है या दो लोगों के अहम के कारण लाखों लोगों की नौकरियां दांव पर लगाई जा सकती है गारमेंट सेक्टर हवा हवाई सेक्टर नहीं या सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 15,00,00,000 लोगों को रोजगार देता है

भारत के कई शहर इसकी बदौलत रौशन ट्रम्प ने टैरिफ के ऊपर 25% जुर्माना लगाया है और ऐसा कर भारत के रोजगार पर बड़ा हमला कर दिया है इस एक तर्रिफ से बेरोजगारी आने वाली है उसकी आप कल्पना नहीं कर सकते इस एक फैक्टरी में आप जहाँ तक देखेंगे ज्यादातर महिलाएं ही काम करती नजर आएंगी

इन महिलाओं के दम पर गारमेंट सेक्टर चल रहा है यहाँ काम करने वाली ज्यादातर महिलाओं को पता नहीं होगा की उनकी नौकरी पर संकट आने वाला है किसी को बच्चे की फीस के लिए तो किसी को बच्चों की शादी के लिए पैसे जमा करने इन सब की योजनाएं अचानक धक्का खा सकती है

क्या दिल्ली में किसी को फर्क पड़ता है कि ट्रम्प के टैरिफ के कारण कुछ हफ्तों या कुछ दिनों में ये कुर्सियां खाली हो जाएंगी अकेले कर्नाटक में ही करीब 10 से 12,00,000 महिलाएं इस सेक्टर में काम करती है, जिनके रोजगार पर संकट आ सकता है अमेरिका को भारत जितना गारमेंट्स निर्यात करता है, उसका 25% अकेले कर्नाटक से जाता है

कल्पना कीजिए, टैरिफ के कारण यह मशीन है, अब वीरान हो जाएंगी और यहाँ काम करने वाली महिलाएं बेकार इस दृश्य को अगर आप नज़र के सामने रखेंगे तभी ठीक से देख पाएंगे ट्रंप के फैसले का असर किस तरह के घरों पर होने वाला है

मतलब लेडीज है लेडीज लेबर है ये वुमेन एम्पावरमेंट होता है। इससे आज इंडस्ट्रीज अंदर लोग बहुत परेशान हैं वहीं समझता हूँ अगर वर्कर्स की हुकूमत सेंट्रल गवर्नमेंट इन लोगों के साथ मतलब

क्योंकि ये लोगो को मतलब इंडस्ट्री अगर चलाना है तो मैं समझता हूँ कि सब कार एक बहुत बड़ा इन्सेंटिव देना पड़ेगा मैं समझता हूँ कि सरकार समझती है की बहुत सारे लोग इसमें एम्प्लॉयड और मैं समझता हूँ की तकरीबन मेरे ख्याल से हुकूमत उनको आगे बढ़कर इसमें इन लोगों का साथ देगी

2016 में बेंगलुरु में गारमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं ने जबरदस्त आंदोलन किया तब मामला था कि केंद्र सरकार ने प्रोविडेंट फंड के नियमों में बदलाव कर दिया प्रोविडेंट फंड से कितना पैसा निकाल सकते हैं तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सीमा तय कर दी इस नियम के अनुसार प्रोविडेंट फंड का पूरा पैसा निकालने के लिए कर्मचारी को साल की उम्र तक काम करना पड़ेगा

पहले नियम था कि कभी भी नौकरी छोड़ने के दो महीने बाद आप पूरे पैसे निकाल सकते थे नए नियम से बदलाव कर सिर्फ आधा पैसा निकालने की अनुमति दी गई उस समय बड़े बड़े अखबार पीएफ को लेकर चुप्पी साध गए, लेकिन एक लोकल अखबार में यह खबर छप गई और महिलाओं की नजर पड़ गई

बिना किसी यूनियन के ही बेंगलुरु में महिलाओं का बड़ा आंदोलन हो गया मोदी सरकार ने फैसला लिया फरवरी 2016 लेकिन आंदोलन हुआ उस साल अप्रैल के महीने में ऐसा क्यों हुआ गारमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं के पास समय नहीं होता की गोदी चैनल देखें या अखबार पढ़े उन्हें पता नहीं चला

16 अप्रैल को विजय कर्नाटक का नाम के अखबार में खबर छप जाती है कि अगर अप्रैल का महीना खत्म होने से पहले महिलाओं ने कर्मचारियों ने ईपीएफ के लिए अप्लाइ नहीं किया तो 1 मई से नई नीती लागू हो जाएगी और सिर्फ 50 फीसद पैसा ही निकाला जा सकेगा महिलाओं के बीच ये रिपोर्ट आग की तरह फैल गई। बेटी की शादी कैसे होगी फीस कैसे भरी जाएगी

कई महिलाएं नौकरी छोड़ने की सोचने लगी के ईपीएफ का पैसा अभी निकाल लेते हैं। फैक्टरी के मालिक परेशान हो गए की मास स्केल पर महिलाएं नौकरी छोड़ सकती है

जिससे इंडस्ट्री ठप ना हो जाए महिलाओं में जबरदस्त प्रदर्शन किया गारमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं ने दिल्ली की सरकार को झुका दिया अरुण जेटली को फैसला वापस लेना पड़ा गारमेंट सेक्टर पर पहले 25% का टैरिफ लगा, वह भी कम नहीं था

फिर भी इस सेक्टर के लोग अमेरिका की बड़ी ब्रैंड कंपनियों से बातचीत कर रहे थे कि 6-7 प्रतिशत लागत घटाकर क्या कुछ किया जा सकता है, लेकिन रूस से तेल खरीदने के कारण 25% अतिरिक्त जुर्माना लगा दिया गया, जिसके बाद अब सारे विकल्प बंद हो गए

भारत के कपड़ा निर्माताओं ने लंबे दौर के संघर्ष के बाद कई देशों में तैयार कपड़े को मात देकर अपनी जगह बनाई अमेरिका जाने वाला तैयार कपड़ा अच्छी और हाई क्वालिटी का होता है। उनके डिजाइन अलग होती है और इस वजह से काफी महंगा भी होता है यह जो आप देख रहे हैं वह भारत के व्यापारियों और कारीगरों की उद्यमशीलता का कमाल एक समय था जब अमेरिका से तैयार कपड़ा भारत आता था

मगर इन सबकी मेहनत की बदौलत भारत से अमेरिका जाने लगा बड़ी बड़ी ब्रांडेड कंपनियों ने भारत में अपनी फैक्टरी लगाई टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि एशिया के बाजार में पतलून और शर्ट बनाने के मामले में भारत को कोई टक्कर नहीं दे सकता हमारे यहाँ की शर्ट और पतलून सबसे अधिक निर्यात की जाती

 

ट्रम्प के टैरिफ की वजह से तबाही के कगार पर गारमेंट सेक्टर, लाखों महिलाओं की नौकरियाँ जा सकती हैं

बांग्लादेश के रास्ते चीन और वियतनाम ने भारत में सस्ता गारमेंट डम करना शुरू किया लेकिन सरकार ने ड्यूटी लगाकर राहत दी बाद से यह सेक्टर अभी उबर रहा था रफ्तार पकड़ने लगा था कि ट्रम्प के टैरिफ ने धड़ाम से ब्रेक लगा दिया रूस से तेल खरीदने के कारण जुर्माना 25% अतिरिक्त लगाया

इस कारण भारत का कपड़ा अमेरिका के बाजार में अब नहीं टिक पाएगा क्योंकि कंबोडिया, बांग्लादेश और वियतनाम के गारमेंट्स 30-31 प्रतिशत कम दाम पर अमेरिकी ग्राहकों को मिल जाएंगे 50% बढ़ जाएगी तो वहाँ पे नहीं करेंगे, वो क्या करेंगे

यूएसए वाले और कोई देश से लेकर बेचेंगे तो हमारा जो प्रॉडक्ट है, इंडिया का जो प्रॉडक्ट है, उनको टोटली लॉस हो जाएगा और वो क्या करेंगे की भाई लॉस होगा प्रोडक्शन भी नहीं कर सकते

प्रोडक्शन कम किया तो एम्प्लॉयमेंट लॉस होगा, एम्प्लॉई कम करना पड़ेगा तो उसमें इम्प्लॉई लॉस होगा और गवर्नमेंट को रेवेन्यू लॉस होगी

जैसे गूगल आदेश है, थाईलैंड है, इंडोनेशिया है अपना वो वहाँ पे इंडिया की मार्केट से

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव का मानना है कि टैरिफ के बाद से टेक्स्टाइल जमीन, जुलरी, झींगा मछली और कारपेट सेक्टर का निर्यात 70% कम हो जाएगा इससे लाखों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री सुजन हाजरा ने कहा है, करीब 20,00,000 लोगों की नौकरियां जा सकती है

टेक्सटाइल सेक्टर अमेरिका को 10 अरब डॉलर का निर्यात करता है जमीन जूलरी 12 अरब डॉलर का अभी हम सिर्फ एक सेक्टर की बात कर रहे हैं ट्रंप के टैरिफ के कारण कई और सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हैं यानी अमेरिका को निर्यात होने वाला 60 डॉलर का सामान प्रभावित होगा

जब ये नहीं बिकेगा तो इसे बनाने में लगे लोगों की नौकरियां जाएंगी, कंपनियां बैठ जाएंगी एक पूरी इंडस्ट्री बर्बादी के कगार पर है और गोदी मीडिया में लफ्फाजी चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं स्वदेशी खरीदिए लेकिन इस गारमेंट फैक्टरी में काम करने वाली महिलाओं को क्या स्वदेशी के नारे से बचाया जा सकता है सरकार को बताना चाहिए

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